प्यार का पंरीदा

आज एक परिंदे को,
प्यार में तड़फते देखा.
उसे प्यार में मरते देखा,
और देखा प्यार के लिए जीने की तम्मना.

मैंने देखा उसके प्यार को,
वह निष्ठुर बना रहा.
न समझ पाया परिंदे के प्यार को,
और बन बैठा हत्यारा अपने प्यार का.

क्या गुनाह किया परिंदे ने,
सिर्फ किया तो उसने प्यार था.
जी रहा वो हत्यारा पँछी का,
आज किसी दूसरे यार संग.

4 टिप्पणियाँ:

Mithilesh dubey २६ फरवरी २०१० ७:२० AM  

बहुत सुन्दर गिरीश भईया ।

बवाल २ मार्च २०१० ९:५२ AM  

बहुत ख़ूब! दर्द भरा प्रवाह। आह से उपजा होगा गान।

- हिंदी होस्ट HindiHost.com The Professional Domain Hosting and Design by HindiHost.com

Back to TOP