उड़न तश्तरी से रू ब रू : ब्लागिंग पर समीर लाल

मशहूर ब्लॉगर श्री समीर लाल जी से हुई बात चीत में ब्लागिंग को लेकर हुई चर्चा का पहला एपीसोड सादर प्रस्तुत है.समीर लाल जी का मत है कि हिंदी ब्लागिंग अपने उच्च मुकाम पर पहुंचेगी ये तयशुदा बात है .
समीर लाल जी से हुई बात चीत सुनिए नीचे  और  संवाद एवं विमर्श पर  भी


71 टिप्पणियाँ:

संगीता पुरी ७ फरवरी २०१० ७:५२ AM  

समीर जी और आपकी ये बात चीत बहुत अच्‍छी लगी .. आपके मध्‍य ब्‍लागिंग के बारे में बहुत अच्‍छी चर्चा हुई .. दो चार दिनों में मैं फिर से अधिक से अधिक ब्‍लोगों पर टिप्‍पणियां शुरू करना सोंच रही हूं .. दूसरी बैकअप वाली जानकारी भी मुझे बहुत अच्‍छी लगी .. मेरे बहुत सारे लेख की मैने अपने पास कोई कॉपी नहीं रखी है .. जल्‍द ही बैकअप रख लेती हूं !!

भारत ब्रिगेड ७ फरवरी २०१० ९:३६ AM  

संगीता जी
आपका आना महत्वपूर्ण है
शुभ कामनाएं
Girish Billore

Neeraj नीरज نیرج ७ फरवरी २०१० ५:४५ PM  
यह पोस्टलेखक के द्वारा निकाल दी गई है.
Neeraj नीरज نیرج ७ फरवरी २०१० ५:४७ PM  

समीर भैया ने शुरूआती दौर में हमारे साथ ब्लागिंग शुरू की और नियमित लेखन, पठन-पाठन और टीपांकन करते आए हैं। कई साथियों का हौसला बढ़ाया। अपनी रचनाओं से हमें कई बार गुदगुदाया और कभी रुलाया भी है। ऐसा इसलिए नहीं कि इन्हें मैं कोई लाइफ़टाइम एचीवमेंट अवार्ड देना चाहता हूं। वे पितामह लगते हैं।
निःसंदेह बेहतरीन शख़्सियत और क़लम के धनी है समीर लाल।
बातचीत रोचक लगी। हिन्दी ब्लागिंग के शुरूआती दिनों की यादें ताज़ा हो गईं।
प्रस्तुतकर्ता गिरीश बिल्लौरे जी को हार्दिक धन्यवाद.

ताऊ रामपुरिया ७ फरवरी २०१० ८:३१ PM  

बहुत अच्छा लगा यहां पर बातचीत सुनना. समीरजी ने जितना समय और मेहनत हिंदी ब्लागिंग के लिये की है उतना किसी और द्वारा किया जाना असंभव लगता है.

उडनतश्तरी अपने आप मे एक स्कूल है और हम उसी स्कूल के पास आऊट स्टुडेंट हैं.

रामराम.

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:३८ PM  

आज अपने आदरणीय गुरूजी से मिलकर बहत अच्छा लगा... अभी बातचीत सुन रहे हैं....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:४४ PM  

याहू ग्रुप के बारे में भी जान कर अच्छा लगा...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:४५ PM  

अच्छा! उस वक़्त सिर्फ १०४ ही लोग थे....?

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:४६ PM  

Very surprising.... आदरणीय गुरूजी....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:४६ PM  

हाँ! इंग्लिश में तो अनगिनत हैं....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:४७ PM  

लेकिन चाइना सिर्फ अपने ही देश में पोपुलर है....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:४९ PM  

हाँ! सब कुछ बाज़ार पर ही डिपेंड है...

राजेश स्वार्थी ७ फरवरी २०१० ८:४९ PM  

समीर जी को इस तरह जानना बहुत ही अच्छा लगा. भारत ब्रिगेड का धन्यवाद.

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:४९ PM  

पर्यावरण.... पर तो बहुत ही ज़रूरी है....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५० PM  

गुरु जी ने सही कहा.... हम तो अभी पांचवीं /छठी तक भी नहीं पहुंचे हैं....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५१ PM  

सही कहा आपने....अभी primary स्कूल ही मान कर चलें....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५२ PM  

सच कहा आपने गुरूजी .... छिद्रान्वेषी लोग छिद्र खोज ही निकालेंगे...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५३ PM  

हाँ ! आरोप ...सुझाव ही होते हैं......

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५४ PM  

ठीक कहा आपने ..बुराई तो निकल ही आती है....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५५ PM  

jee.... गुरु जी के देश प्रेम को मैं भी सैल्यूट करता हूँ...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५५ PM  

हां! आभास को भी देख कर अच्छा लगा था...

ताऊ रामपुरिया ७ फरवरी २०१० ८:५५ PM  

पूरी वार्ता सुनी और बहुत ही रोचकता से परिपुर्ण और शिक्षाप्रद है. चमेली के फ़ूल का उदाहरण पसंद आया, वाकई बहुत सुंदर.

रामराम

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५६ PM  

ओह! अमिताभ जी लाइन पर आ गए हैं.... होल्ड पर हैं अभी....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५७ PM  

अभी थोड़ी शान्ति छाई है....लगता है अभी होल्ड पर हैं....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५७ PM  

हाँ हाँ! नए सिरे से शुरू करिए...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५७ PM  

मेरा भी नमस्कार कहिये अमिताभ जी से....

makrand ७ फरवरी २०१० ८:५८ PM  

वार्ता बहुत ही रोचक लगी.

makrand ७ फरवरी २०१० ८:५९ PM  

अरे महफ़ूज अंकल नाम्स्ते...ये क्या रनिंग कमेंट्री चल रही है?:) बहुत दिनों बाद दिखे?

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ८:५९ PM  

एक मिनट... मेरा एक फोन आया है.... पौज़ पर लगा दिया है....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:०० PM  

अरे! मकरंद ...आजकल टाइम ही नहीं मिल पा रहा है.... कल रामप्यारी भी नाराज़ हो रही थी....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:०१ PM  

यह फोन को भी इसी वक़्त आना था...

दीपक "तिवारी साहब" ७ फरवरी २०१० ९:०२ PM  

वाह आज पहली बार ये पोडकास्ट सुना, समीर जी की आवाज सुन कर और पूरी वार्ता सुनकर बहुत कुछ मालूम चलता है कि ब्लागिंग का इतिहास क्या है?

अजय कुमार झा ७ फरवरी २०१० ९:०२ PM  

गिरीश भाई आपका ये नया प्रयोग बहुत ही अनूठा है और निश्चित रूप से आने वाले समय में ये एक ऐतिहासिक कदम साबित होने जा रहा है , समीर जी का साक्षात्कार बहुत ही श्रवणीय और संग्रहणीय लगी , बहुत ही बढिया अंक रहा
अजय कुमार झा

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:०४ PM  

हाँ! फोन कट गया.... अब आगे बातचीत सुनते हैं....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:०५ PM  

हां बैक अप बहुत ज़रूरी है...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:०५ PM  

अच्छा! मैं भी अब वर्ड पैड पर लिखूंगा....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:०७ PM  

बिलकुल सही कहा... पता नहीं लोग क्यूँ नराजगी पालते हैं... छोटे कमेन्ट पर....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:०७ PM  

हा हा हा हा हा .....सीचना तो पड़ेगा ही फूलों को.....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:०८ PM  

जी...हर आदमी मोटी चमड़ी का नहीं है....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:०९ PM  

जी...प्रोत्साहन बहुत ज़रूरी है.... मैं आप ही के पद चिन्हों पर चल रहा हूँ.... गुरूजी...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:१० PM  

बिलकुल सही...कहा आपने...मामला खुन्नस का ही है...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:१२ PM  

ह्म्म्म हम्म हम्म....सही कह रहे हैं आप...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:१३ PM  

ओह ! पेज रिफ्रेश हो गया...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:२९ PM  

जी,... हिंदी के फैलाव से ही हिंदी को विज्ञापन मिलेगा....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:३० PM  

जी...रीडरशिप बढ़ाना ज़रूरी है...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:३१ PM  

जी...अगर आर्थिक लाभ मिले तो फुल टाइम किया ही जा सकता है...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:३२ PM  

हाँ! टी.वी. पे वो विज्ञापन देख रहे हैं कि बाघ बचाइए ... इसके लिए ब्लॉग लिखिए..

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:३३ PM  

विदेशों में ब्लॉग की स्तिथि जानकर अच्छा लगा...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:३४ PM  

...जी...प्रिंट मीडिया का ही है... सही कहा आपने....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:३४ PM  

जी ...हर घर में हो जातीं हैं...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:३५ PM  

अरे! चिन्मय को ढेर सारा प्यार....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:३७ PM  

जी जी.... सिमित ही था उस वक़्त...

अरे वाह! डेढ़ लाख लोगों का.....

बहुत बहुत बधाई...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:३८ PM  

जी...मैं भी दो चार बार नहीं लिख पाता हूँ.... कंटेंट का ख्याल तो करना ही पड़ता है.... और आजकल तो टाइम की कमी बहुत हो रही है...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:३९ PM  

हां! ट्रैफिक में उतार चढ़ाव तो पोस्ट के आने पर ही होता है....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:४१ PM  

जी ...जबलपुर का पानी ही बहुत अच्छा है...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:४१ PM  

जी.... सेम्लानी जी को भी मेरा नमस्कार कहियेगा...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:४३ PM  

अरे! आप मार्च में नहीं आ पाएंगे....? मैं यहाँ पूरी तैय्यारी कर के रखा हुआ हूँ.... प्लीज़ आ जाइये ...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:४५ PM  

पर गुरु जी ...दिवाली बहुत दूर है...

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:४५ PM  

जी मैं भी आपकी प्रतीक्षा कर रहा हूँ....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:४६ PM  

जी... नमस्कार.... शुभ रात्रि....

महफूज़ अली ७ फरवरी २०१० ९:४६ PM  

बहुत अच्छी लगी यह बातचीत....

गुरु जी को सादर प्रणाम ....

आपका

महफूज़....

संजीव शर्मा,  ७ फरवरी २०१० १०:०० PM  

महफूज़ जी तो पूरे सक्षात्कार में साथ साथ कमेंट करते रहे हैं, यह बड़ा अच्छा लगा.

मुनीश ( munish ) ७ फरवरी २०१० ११:५४ PM  

It is a great honour ,indeed, to hear Sameer bhai speak on the subject of contemporary blogging. Sameer bhai is a real 'hardil azeez' personality in our blogosphere and i salute his endeavours and hard work for the cause of Hindi blogging.

बवाल ८ फरवरी २०१० १२:०३ AM  

वाह वाह मुकुल भाई क्या कहना! इस पॉडकास्ट इंटरव्यू का, कोई जवाब नहीं भाई। समीरलाल जी से आपका यह वार्तालाप अपने आप में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बहुत सी ऐसी बातें कहीं जो हिंदी ब्लॉगर्स के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। यहाँ भविष्य की बहुत सी संभावनाओं की बात की गई है, जो हमें प्रेरित भी करती है और सतर्क भी। आपका बहुत बहुत आभार इस रोचक और बेहतरीन साक्षात्कार के लिए।

महाशक्ति १० फरवरी २०१० २:१० PM  

बम्‍पर प्रस्‍तुति, इससे अच्‍छा कुछ और हो ही नही सकता।

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