उत्पाद महंगे , उत्पादक भिखमंगे
दरअसल हुआ ये कि ;उस दिन अचानक श्रीमती जी की जगह जोश में मैं ख़ुद राशन लाने चला गया, वहाँ जाकर मेरे अंदाजे का क्या रहा, या कि मुझे आंटे दाल का भाव कैसे पता चला, और ये कि मुझे ये नहीं समझ आया कि अब तक सब्जी , फलों वालों ने अपने यहाँ क्रेडिट कार्ड मशीन क्यों नहीं लगाई, इन सब बातों को तो रहने ही दिजीये, मैंने तो ये सोचा कि यार जब आंटे , चावल, दालों, सब्जी आदि का भाव इतना आसमान छू रहा है तो अपने किसान काका गाओं में बैठ कर चांदी कूट रहे होंगे , तभी कहूं कि इतने दिनों से मुझसे बात भी नहीं की। मैंने तय किया कि आज ही फोन मिलाता हूँ।
फोन मिलते ही मैंने तो बस हालचाल ही पूछा कि वो बगैर पूछे ही शुरू हो गए, " बेटा मैं तो पिछले कई दिनों से तुमसे बात करने की सोच रहा था , मगर झिझक के कारण कुछ कह नहीं पा रहा था , दरअसल तुम्हारी काकी, तुम्हारे भैया, भाभी सभी बीमार पड़े हैं और घर में इतने पैसे भी नहीं हैं कि इलाज करा सकूं। यहाँ सबका यही हाल है । वो जो कोने के मकान वाले दिनू चाचा थे उन्होंने तो परसों ही फांसी लगा ली बेटा साहूकार के कर्जे के कारण। तू जल्दी से कुछ पैसे भेज सके तो अच्छा हो।"



9 टिप्पणियाँ:
बात तो भैया १०० % सही है पर का करे
बहुत से बिरोधाभास जिन्दगी से टकराते है
मै तो इसी से परेशान हू कि -
जिन्दगी ४ दिन की तो टेस्ट मैच ५ दिन का क्यू है
अर्थशास्त्र पर दलालीशास्त्र हाबी है, इसलिए नये समीकरण खड़े हो गये हैं.
Swagat hai ajay bhai
sach kaha sameer bhai ne
समीर लाल जी की बातों से सहमत हूं .. दलाली जबतक समाप्त नहीं होगी .. किसानों का यही हाल रहेगा !!
विषमताएँ इतनी भयानक हो चुकी है कि --
अर्थशास्त्र के सिध्दांत जमीनी लोगों के लिये तो नहीं हैं शायद
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अर्थशास्त्र मे तो माँग का लोच(ा) है। बढि़याँ लगी भई जी
ाजय जी जब आपको समझ नही आया तो हम तो आपसे अधिक नालायक हैं । इसे तो शायद भगवान भी नही समझ सकेंगे दलालों ने इसे इतना जटिल कर दिया है। धन्यवाद्
Nice Posting Sir..
Dear Sir,
कुछ दिनों पहले मेरी आईडी हैक कर ली गई। मैंने काफी प्रयास किया लेकिन उसे वापस पाने में असमर्थ रहा। आईडी हैक हो जाने की वजह से मैं अपने ब्लॉग http://koitohoga.blogspot.com/ को एक्सेस नहीं कर पा रहा हूँ... इसलिए मैंने नया ब्लॉग http://dhentenden.blogspot.com बना लिया है। उम्मीद करता हूँ कि मेरे इस ब्लॉग को भी आप लोगों का वही प्यार मिलता रहेगा!!!
Regards
Ram K Gautam
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