श्री शरद कोकास, श्री कुलवंत हैप्पी, श्रीमती संगीता पुरी श्री अविनाश वाचस्पति एवंभाई दीपक मशाल से बात चीत
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5 टिप्पणियाँ:
अभी दीपक मशाल जी को और सुन लिया एवं अच्छा लगा.
Bhai sameer ji
shukriyaa
अभी दीपक और कुलवंत भाई को सुना बहुत अच्छा लगा। और दीपक भाई की कविता तो बा ही गई।
और तो बहुत मोती आपने छोड़ रखे है, जल्द ही आकर बटोरूगाँ।
Shukriya bhai pramendra ji
चश्मे के हार
के साथ कानों के कुंडल
(हैडफोन विद माइक)
अवश्य लें और
रूबरू हों मुकुल जी से
जिनसे बातचीत करके
मन कमल खिल जाता है
सच कहूं
आजकल तो
तकनीक ही विधाता है।
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