श्री शरद कोकास, श्री कुलवंत हैप्पी, श्रीमती संगीता पुरी श्री अविनाश वाचस्पति एवंभाई दीपक मशाल से बात चीत

एक कोशिश है पाडकास्ट साक्षात्कार सव्यसाची  कला  ग्रुप  जबलपुर के पन्नो पर श्री शरद कोकास, श्री कुलवंत हैप्पी, श्रीमती संगीता पुरी के साक्षात्कार के बाद आज  एवं श्री अविनाश वाचस्पति के साथ बातचीत भाग  एक एवं भाग दो के साथ भाई दीपक मशाल से बात चीत सुनिए  इस कोशिश में कमियाँ ज़रूर होंगी आपका हार्दिक स्वागत है उन कमियों एवं त्रुटियों पर ध्यान आकृष्ट कराने . ब्लॉग जगत से इतर लोगों को भी यथा संभव यहाँ लाने की कोशिश में हूँ.
सादर

 
चश्मे का हार पहने अविनाश जी 


भाई दीपक मशाल जी 
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जिन साथियों ने हेड फोन खरीद लिए हैं कृपया तुरंत मेरे मेल पते पर सूचित कीजिये शायद आपका अगला नंबर हो 
 

5 टिप्पणियाँ:

Udan Tashtari ३ फरवरी २०१० ९:०६ AM  

अभी दीपक मशाल जी को और सुन लिया एवं अच्छा लगा.

महाशक्ति ३ फरवरी २०१० ९:२२ AM  

अभी दीपक और कुलवंत भाई को सुना बहुत अच्‍छा लगा। और दीपक भाई की कविता तो बा ही गई।


और तो बहुत मोती आपने छोड़ रखे है, जल्‍द ही आकर बटोरूगाँ।

अविनाश वाचस्पति ३ फरवरी २०१० ११:३९ AM  

चश्‍मे के हार

के साथ कानों के कुंडल

(हैडफोन विद माइक)
अवश्‍य लें और

रूबरू हों मुकुल जी से

जिनसे बातचीत करके

मन कमल खिल जाता है

सच कहूं

आजकल तो

तकनीक ही विधाता है।

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