यहाँ तीर्थ तुल्य माता होती

मेरे प्रिय गीतकार गुरु घनश्याम चौरसिया  बादल  की रचना जो दिल की गहराइयों में आज तक सम्हाली हुई है आप सभी के लिए सादर प्रस्तुत है

5 टिप्पणियाँ:

महफूज़ अली २ फरवरी २०१० ९:२८ PM  

नोट: लखनऊ से बाहर होने की वजह से .... काफी दिनों तक नहीं आ पाया ....माफ़ी चाहता हूँ....

Udan Tashtari २ फरवरी २०१० ११:३९ PM  

बढ़िया गाया. गीत अच्छा लगा.

Udan Tashtari २ फरवरी २०१० ११:४४ PM  

करता पश्चिम अगुवानी है??

मैं समझता हूँ पूरब अगुवानी कर रहा है और पश्चिम अनुसरण कर रहा है...यह गीत के भाव होना था..क्या मैं सुनने में कुछ गलत या समझने में कुछ गलत??

दीपक 'मशाल' ३ फरवरी २०१० १:४२ AM  

जितना सुन्दर गीत ठीक उतनी ही सुन्दर रही प्रस्तुति... सुनाने के लिए आभार 'मुकुल' सर
जय हिंद...

निर्मला कपिला ३ फरवरी २०१० ११:५२ AM  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति धन्यवाद

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