यहाँ तीर्थ तुल्य माता होती
मेरे प्रिय गीतकार गुरु घनश्याम चौरसिया बादल की रचना जो दिल की गहराइयों में आज तक सम्हाली हुई है आप सभी के लिए सादर प्रस्तुत है
भारतीय संस्कृति के स्नेहियों के लिए
मेरे प्रिय गीतकार गुरु घनश्याम चौरसिया बादल की रचना जो दिल की गहराइयों में आज तक सम्हाली हुई है आप सभी के लिए सादर प्रस्तुत है
- हिंदी होस्ट HindiHost.com The Professional Domain Hosting and Design by HindiHost.com
Back to TOP
5 टिप्पणियाँ:
नोट: लखनऊ से बाहर होने की वजह से .... काफी दिनों तक नहीं आ पाया ....माफ़ी चाहता हूँ....
बढ़िया गाया. गीत अच्छा लगा.
करता पश्चिम अगुवानी है??
मैं समझता हूँ पूरब अगुवानी कर रहा है और पश्चिम अनुसरण कर रहा है...यह गीत के भाव होना था..क्या मैं सुनने में कुछ गलत या समझने में कुछ गलत??
जितना सुन्दर गीत ठीक उतनी ही सुन्दर रही प्रस्तुति... सुनाने के लिए आभार 'मुकुल' सर
जय हिंद...
बहुत सुन्दर प्रस्तुति धन्यवाद
एक टिप्पणी भेजें