चिंतन और आकलन: हम और हमारी हिन्दी --संजीव सलिल

चिंतन और आकलन:                                                                                           

हम और हमारी हिन्दी

संजीव सलिल'
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हिंदी अब भारत मात्र की भाषा नहीं है... नेताओं की बेईमानी के बाद भी प्रभु की कृपा से हिंदी विश्व भाषा है. हिंदी के महत्त्व को न स्वीकारना ऐसा ही है जैसे कोई आँख बंद कर सूर्य के महत्त्व को न माने. अनेक तमिलभाषी हिन्दी के श्रेष्ठ साहित्यकार हैं. तमिलनाडु के विश्वविद्यालयों में हिन्दी में प्रति वर्ष सैंकड़ों छात्र एम्.ए. और अनेक पीएच. डी. कर रहे हैं. मेरे पुस्तक संग्रह में अनेक पुस्तकें हैं जो तमिलभाषियों ने हिन्दी साहित्यकारों पर लिखी हैं. हिन्दी भाषी प्रदेश में आकर लाखों तमिलभाषी हिन्दी बोलते, पढ़ते-लिखते हैं.
अन्य दक्षिणी प्रान्तों में भी ऐसी ही स्थिति है.



मुझे यह बताएँ लाखों हिन्दी भाषी दक्षिणी प्रांतों में नौकरी और व्यवसाय कर रहे हैं, बरसों से रह रहे हैं. उनमें से कितने किसी दक्षिणी भाषा का उपयोग करते हैं. दुःख है कि १% भी नहीं. त्रिभाषा सूत्र के अनुसार हर भारतीय को रह्स्त्र भाषा हिंदी, संपर्क भाषा अंगरेजी तथा एक अन्य भाषा सीखनी थी. अगर हम हिंदीभाषियों ने दक्षिण की एक भाषा सीखी होती तो न केवल हमारा ज्ञान, आजीविका अवसर, लेखन क्षेत्र बढ़ता अपितु राष्ट्र्री एकता बढ़ती. भाषिक ज्ञान के नाम पर हम शून्यवत हैं. दक्षिणभाषी अपनी मातृभाषा, राष्ट्र भाषा, अंगरेजी, संस्कृत तथा पड़ोसी राज्यों की भाषा इस तरह ४-५ भाषाओँ में बात और काम कर पाते हैं. कमी हममें हैं और हम ही उन पर आरोप लगाते हैं. मुझे शर्म आती है कि मैं दक्षिण की किसी भाषा में कुछ नहीं लिख पाता, जबकि हिन्दी मेरी माँ है तो वे मौसियाँ तो हैं.

यदि अपनी समस्त शिक्षा हिन्दी मध्यम से होने के बाद भी मैं शुद्ध हिन्दी नहीं लिख-बोल पाता, अगर मैं हिन्दी के व्याकरण-पिंगल को पूरी तरह नहीं जानता तो दोष तो मेरा ही है. मेरी अंगरेजी में महारत नहीं है जबकि मैंने इंजीनियरिंग में ८ साल अंगरेजी मध्यम से पढ़ा है. मैंने शालेय शिक्षा में संस्कृत पढी पर एक वाक्य भी संकृत में बोल-लिख-समझ नहीं सकता, मुझे बुन्देली भी नहीं आती, पड़ोसी राज्यों की छतीसगढ़ी, भोजपुरी, अवधी, मागधी, बृज, भोजपुरी से भी मैं अनजान हूँ... मैं स्वतंत्र भारत में पैदा हुई तीन पीढ़ियों से जुड़ा हूँ देखता हूँ कि वे भी मेरी तरह भाषिक विपन्नता के शिकार हैं. कोई भी किसी भाषा पर अधिकार नहीं रखता... क्यों?

मेंरे कुछ मित्र चिकित्सा के उच्च अध्ययन हेतु रूस गए... वहाँ पहले तीन माह रूसी भाषा का अध्ययन कर प्रमाणपत्र परीक्षा उत्तीर्ण की तब रूसी भाषा की किताबों के माध्यम से विषय पढ़ा. कोई समस्या नहीं हुई.. विश्व के विविध क्षेत्रों से लाखों छात्र इसी तरह, रूस, जापान आदि देशों में जाकर पढ़ते हैं. भारत में हिन्दी भाषी ही हिन्दी में दक्ष नहीं हैं तो तकनीकी किताबें कब हिन्दी में आयेंगी?, विदेशों से भारत में आकर पढनेवाले छात्र को हिन्दी कौन और कब सिखाएगा? हम तो शिशुओं को कन्वेंतों में अंगरेजी के रैम रटवाएं, मेहमानों के सामने बच्चे से गवाकर गर्व अनुभव करें, फिर हर विषय में ट्यूशन लगवाकर प्रवीणता दिलाएं हिंदी को छोड़कर... यह हिंदी-द्रोह नहीं है क्या? आप अपनी, मेरी या किसी भी छात्र की अंक सूची देखें... कितने हैं जिन्हें हिन्दी में प्रवीणता के अंक ८०% या अधिक मिले? हम विषयवार कितने घंटे किस विषय को पढ़ते हैं? सबसे कम समय हिंदी को देते हैं. इसलिए हमें हिन्दी ठीक से नहीं आती. हम खिचडी भाषा बोलते-लिखते हैं जिसे अब 'हिंगलिश' कह रहे हैं.

दोष हिन्दी भाषी नेताओं की दूषित मानसिकता का है जो न तो खुद भाषा के विद्वान थे, न उन्होंने भाषा के विद्वान् बनने दिये. त्रिभाषा सूत्र की असफलता का कारण केवल हिन्दीभाषी नेता हैं. भारत की भाषिक एकता और अपने व्यक्तिगत लाभ (लेखन क्षेत्र, अध्ययन क्षेत्र, आजीविका क्षेत्र, व्यापार क्षेत्र के विस्तार) के लिये भी हमें दक्षिणी भाषाएँ सीखना ही चाहिए. संगीत, आयुर्वेद, ज्योतिष, तेल चिकित्सा आदि के अनेक ग्रन्थ केवल दक्षिणी भाषाओँ में हैं. हम उन भाषाओँ को सीखकर उन ग्रंथों को हिन्दी में अनुवादित करें.

आशा की किरण:

अन्तरिक्षीय प्रगति के कारण आकाश गंगा के अन्य सौर मंडलों में सभ्यताओं की सम्भावना और उनसे संपर्क के लिये विश्व की समस्त भाषाओँ का वैज्ञानिक परीक्षण किया गया है. ध्वनि विज्ञानं के नियमों के अनुसार कहे को लिखने, लिखे को पढने, पढ़े को समझने और विद्युत तरंगों में परिवर्तित-प्रति परिवर्तित होने की क्षमता की दृष्टि से संस्कृत प्रथम, हिन्दी द्वितीय तथा शेष भाषाएँ इनसे कम सक्षम पाई गयीं. अतः इन दो भाषाओँ के साथ अंतरिक्ष वा अन्य विज्ञानों में शोध कार्य समपन्न भाषों यथा अंगरेजी, रूसी आदि में पृथ्वीवासियों का संदेश उन सभ्यताओं के लिये भेजा गया है. हिन्दी की संस्कृत आधारित उच्चारणपद्धति,शब्द-संयोजन और शब्द-निर्माण की सार्थक प्रणाली जिसके कारण हिन्दी विश्व के लिये अपरिहार्य बन गयी है, कितने हिंदी भाषी जानते हैं?

समय की चुनौती सामने है. हमने खुद को नहीं बदला तो भविष्य में हमारी भावी पीढियां हिंदी सीखने विदेश जायेंगी. आज विश्व का हर देश अपनी उच्च शिक्षा में हिन्दी की कक्षाएं, पाठ्यक्रम और शोध कार्य का बढ़ता जा रहा है और हम बच्चों को हिन्दी से दूरकर अंगरेजी में पढ़ा रहे हैं. दोषी कौन? दोष किसका और कितना?,

अमरीका के राष्ट्रपति एकाधिक बार सार्वजनिक रूप से अमरीकियों को चेता चुके हैं कि हिन्दी के बिना भविष्य उज्जवल नहीं है. अमरीकी हिन्दी सीखें. हमर अधिकारी और नेता अभी भी मानसिक रूप से अंग्रेजों के गुलाम हैं. उनके लिये हिंदी गुलाम भारतीयों की और अंगरेजी उनके स्वामियों की भाषा है... इसलिए भारतीयों के शशक या नायक बनने के लिये वे हिन्दी से दूर और अंगरेजी के निकट होने प्रयास करते हैं. अंग्रेजों के पहले मुगल शासक थे जिनकी भाषा उर्दू थी इसलिए उर्दू का व्याकरण, छंद शास्त्र और काव्य शास्त्र न जानने के बाद भी हम उर्दू काव्य विधाओं में लिखते हैं जिन्हें उर्दू के विद्वान कचरे के अलावा कुछ नहीं मानते.

कभी नहीं से देर भली... जब जागें तभी सवेरा... हिन्दी और उसकी सहभाषाओं पर गर्व करें... उन्हें सीखें... उनमें लिखें और अन्य भाषाओँ को सीखकर उनका श्रेष्ठ साहित्य हिन्दी में अनुवादित करें. हिन्दी किसी की प्रतिस्पर्धी नहीं है... हिन्दी का अस्तित्व संकट में नहीं है... जो अन्य भाषाएँ-बोलियाँ हिन्दी से समन्वित होंगी उनका साहित्य हिन्दी साहित्य के साथ सुरक्षित होगा अन्यथा समय के प्रवाह में विलुप्त हो जायगा.

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हास्य कुण्डली: संजीव 'सलिल'



















हास्य कुण्डली:
 संजीव 'सलिल'
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घरवाली को छोड़कर, रहे पड़ोसन ताक.
सौ चूहे खाकर बने बिल्ली जैसे पाक..
बिल्ली जैसे पाक, मगर नापाक इरादे.
काश इन्हें इनकी कोई औकात बतादे..
भटक रहे बाज़ार में, खुद अपना घर छोड़कर.
रहें न घर ना घाट के, घरवाली को छोड़कर..
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सूट-बूट सज्जित हुए, समझें खुद को लाट.
अंगरेजी बोलें गलत, दिखा रहे हैं ठाठ..
दिखा रहे हैं ठाठ, मगर मन तो गुलाम है.
निज भाषा को भूल, नामवर भी अनाम है..
हुए जड़ों से दूर, पग-पग पर लज्जित हुए.
घोडा दिखने को गधे, सूट-बूट सज्जित हुए..
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गाँव छोड़ आये शहर, जबसे लल्लूलाल.
अपनी भाषा छोड़ दी, तन्नक नहीं मलाल..
तन्नक नहीं मलाल, समझते खुद को साहब.
हँसे सभी जब सुना: 'पेट में हैडेक है अब'..
'फ्रीडमता' की चाह में, भटकें तजकर ठाँव.
होटल में बर्तन घिसें, भूले खेती-गाँव..
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दिव्यनर्मदा.ब्लागस्पाट.कॉम

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जन्म दिन मनवाने वाले पाबला जी :धन्यवाद

http://1.bp.blogspot.com/_0P94DcPJ6cE/SMY5gm8C8MI/AAAAAAAAAMQ/dUFdqgoIeNA/s400/animated-ballerina-birthday-cake.gifपाबला जी की वज़ह से सब एक दूसरे को जन्म दिवस पर याद कर लेते हैं आप में से कोई छूटा हो तो अवश्य उनको मेल कर दीजिये वैसे वे स्वयम खोज लेते हैं पर फ़िर भी ...................खैर देखिये आज़ तक के जन्म दिन तो नीचे लिंक्स में आप देख ही सकते हैं यदि आप चाहें तो सीधे => इधर भी देखिये
अंशुमन आशु अक्षयांशी सिंह सेंगर अक्षिता अजय कुमार झा अजित वड़नेरकर अतुल मिश्र अनिता कुमार अनिल कुमार अनिल पुसदकर अनुनाद सिंह अनुराग अन्वेषी अनूप भार्गव अनूप शुक्ल अभिषेक ओझा अभिषेक प्रसाद अमलेन्दु उपाध्याय अमित कुमार यादव अमित गुप्ता अमिताभ त्रिपाठी अमिताभ 'मीत' अरविन्द मिश्रा अरविन्द श्रीवास्तव अरूण अरोरा 'पंगेबाज' अरूण मिश्रा अरूणा राय अर्शिया अली अलबेला खत्री अविनाश वाचस्पति आकांक्षा यादव आदित्य कुमार आदित्य रंजन आर सी मिश्र आलोक पुराणिक आशीष महर्षि इरफ़ान इरफान खान इरशाद अली उदय 'मणि' कौशिक उपदेश सक्सेना उमर कैरानवी उलूक एम वर्मा कंचन सिंह चौहान कनिष्क कश्यप कविता वाचक्नवी कार्तिकेय मिश्र काशिफ़ आरिफ़ कीर्तिश भट्ट कुमारेन्द्र सेंगर कुलवंत हैप्पी कुलवन्त हैप्पी कुश कुसुम ठाकुर कृष्ण कुमार यादव के सी वर्मा (कमलेश वर्मा) कोपल कोकास खुशदीप सहगल गगन शर्मा गिरिजेश राव गिरीन्द्रनाथ झा गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' गौतम राजरिशी घुघूती बासूती चंदन कुमार झा चंद्रमौलेश्वर प्रसाद जतिन्दर परवाज़ जयप्रकाश मानस जवाहर चौधरी ज़ाकिर अली "रजनीश" जाकिर अली 'रजनीश' जादू जी के अवधिया जीतेन्द्र (जीतू) ज्ञानदत्त पाण्डेय डॉ अनुराग डॉ कविता वाचक्नवी डॉ टी एस दराल डॉ मनोज मिश्र डॉ योगेन्द्र मणि कौशिक डॉ विजय तिवारी 'किसलय' डॉ श्रीमति अजित गुपता डॉ. श्रीमती अमर भारती डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री डॉ० अमर कुमार तपन शर्मा तुलसीभाई पटेल दर्पण दिनेश कुमार माली दिनेशराय द्विवेदी दिविक रमेश दीपक 'बेदिल' दीपिका कुमारी देबाशीष देव कुमार झा देवतोष श्रीवास्तव धीरू सिंह नदीम अख़्तर नरेश सिंह राठौड़ नवीन प्रकाश नितीश राज निर्मला कपिला निशांत मिश्रा नीरज "मुसाफिर" जाट नीरज गोस्वामी नीरज बधवार नीलिमा पं. डी. के. शर्मा "वत्स" पंकज उपाध्याय पंकज नारायण पंकज बेंगाणी पंकज मिश्रा पंकज सुबीर परमजीत बाली पल्लवी पवन *चंदन* पवन कुमार पवन कुमार अरविन्द पुनीत ओमर पूजा उपाध्याय पूर्णिमा वर्मन प्रकाश गोविन्द प्रकाश पाखी प्रकाश बादल प्रकाश सिंह 'अर्श' प्रज्ञा प्रसाद प्रणय शर्मा प्रताप सहगल प्रतीक पांडेय प्रत्यक्षा प्रदीप मिश्रा प्रभात गोपाल झा प्रमेन्द्र प्रताप सिंह प्रमोद ताम्बट प्रवीण त्रिवेदी प्रशांत प्रियदर्शी प्रियंकर प्रीति बड़थ्वाल प्रीति मेहता (ρяєєтι) फ़िरदौस खान बवाल बेज़ी जैसन भगीरथ परिहार भुवनेश शर्मा मंसूर अली हाशमी मनविन्दर भिम्बर मनीष कुमार मनीष जैन मनोज बाजपेयी मनोज शर्मा मयंक सक्सेना मयूर दुबे मसिजीवी महफूज अली महावीर बी सेमलानी महावीर शर्मा मानसी मिथिलेश दुबे मीनाक्षी मीनू खरे मुकेश पोपली मुफ़लिस मोनिका गुप्ता मोहन वशिष्ठ यशवंत सिंह यूनुस खान शिखा वार्ष्नेय रंजन मोहनोत रंजना (रंजू) भाटिया रचना त्रिपाठी रचना सिंह रजनीश कुमार झा रजनीश परिहार रज़िया राज रज़ी शाहाब रणधीर सिंह 'सुमन' रतन सिंह शेखावत रवि रतलामी रश्मि रविजा रश्मि स्वरूप राकेश खण्डेलवाल राज भाटिया राजकुमार ग्वालानी राजकुमार सोनी राजीव कुमार राजीव जैन राजीव तनेजा राजेश त्रिपाठी राजेश पटेल राजेश रोशन रानी विशाल रावेंद्रकुमार रवि रौशन ललित शर्मा लवली कुमारी लविज़ा लावण्या शाह लोकेन्द्र विक्रम सिंह वन्दना अवस्थी दुबे वन्दना गुप्ता वाणी गीत विजय कुमार सप्पत्ति विजय वड़नेरे विद्यासागर महथा विनय शर्मा विनीत उत्पल विनीत कुमार विनोद कुमार पांडेय विनोद पाराशर विमल वर्मा विवेक रस्तोगी विवेक सिंह शबनम खान शमा शरद कोकास शशि सिंह शाश्वत शेखर शास्त्री जे सी फिलिप शिखा दीपक शिवकुमार मिश्र शिवम् मिश्रा शिशुपाल प्रजापति शुऐब शुभम मंगला शेफाली पांडे शैलेष भारतवासी श्यामल सुमन श्रीमती आशा जोगलेकर श्रीश पाठक संगीता पुरी संगीता स्वरूप संजय कुमार चौरसिया संजय तिवारी संजय बेंगाणी संजीत त्रिपाठी संजीव कुमार सिन्हा संदीप सजीव सारथी सत्यनारायण भटनागर समीर यादव समीर लाल सागर नाहर सिद्धार्थ जोशी सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी सुजॉय चटर्जी सुधीर सुबोध राय सुरेश चन्द्र गुप्ता सुरेश चिपलूनकर सुरेश शर्मा सुलभ जायसवाल सतरंगी सुशील कुमार सुशील सिंह छौक्कर सूर्य गोयल सूर्यकांत गुप्ता सैयद अकबर स्वप्न मंजूषा शैल हरकीरत हकीर हरि शर्मा हरी शर्मा हर्षवर्धन त्रिपाठी हर्षवर्धन नाहर हिमांशु

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